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Saturday, May 14, 2011
Saturday, November 21, 2009
आल्हा :हिरोशिमा दिवस- ६ अगस्त (एटम बम की शिकार बालिका सडाको की दास्तान)
रचयिता : चुन्नीलाल
चुन्नीलाल जी झोपड़ पट्टी में निवास करने वाले गरीबों की स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और उनके बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष व उनके बच्चों की शिक्षा के लिए काम करते हैं । आशा परिवार एवं जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता तथा भारत नव निर्माण के सहयोगी, सलाहकार वा अतिथि लेखक हैं ।
आल्हा, 6 अगस्त 1945 को जापान देश के हिरोशिमा शहर पर अमेरिका द्वारा किये गए परमाणु बम के हमले में लाखों लोगों की जान जाने और वहां बचे लोगों को खून का कैंसर होने, की याद दिलाता है ताकि जापान की एक बालिका की तरह लोग खून के कैंसर का शिकार न हों और परमाणु बम, मिसाइल, बारूद जैसी चीजें जो मानव,पर्यावरण,पशु-पक्षी,जीव-जंतु सभी के लिए प्राण घातक हैं, लोग इनका विरोध करें । चुनीलाल जी द्वारा दिया गया शांति सन्देश 18 अगस्त 2009 को "सिटिज़न न्यूज़ सर्विस " में भी प्रकाशित हुआ है । भारत नव निर्माण के द्वारा यह सन्देश जन-जन तक पहुचाने में प्रशन्नता का अनुभव हो रहा है । चुन्नीलाल जी का भारत नव निर्माण के सयोगी , सलाहकार वा अतिथि लेखक के रूप में हार्दिक अभिनन्दन बंदन ।
Click here to read poem "AALHA"
चुन्नीलाल जी झोपड़ पट्टी में निवास करने वाले गरीबों की स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और उनके बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष व उनके बच्चों की शिक्षा के लिए काम करते हैं । आशा परिवार एवं जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता तथा भारत नव निर्माण के सहयोगी, सलाहकार वा अतिथि लेखक हैं ।
आल्हा, 6 अगस्त 1945 को जापान देश के हिरोशिमा शहर पर अमेरिका द्वारा किये गए परमाणु बम के हमले में लाखों लोगों की जान जाने और वहां बचे लोगों को खून का कैंसर होने, की याद दिलाता है ताकि जापान की एक बालिका की तरह लोग खून के कैंसर का शिकार न हों और परमाणु बम, मिसाइल, बारूद जैसी चीजें जो मानव,पर्यावरण,पशु-पक्षी,जीव-जंतु सभी के लिए प्राण घातक हैं, लोग इनका विरोध करें । चुनीलाल जी द्वारा दिया गया शांति सन्देश 18 अगस्त 2009 को "सिटिज़न न्यूज़ सर्विस " में भी प्रकाशित हुआ है । भारत नव निर्माण के द्वारा यह सन्देश जन-जन तक पहुचाने में प्रशन्नता का अनुभव हो रहा है । चुन्नीलाल जी का भारत नव निर्माण के सयोगी , सलाहकार वा अतिथि लेखक के रूप में हार्दिक अभिनन्दन बंदन ।
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Atom bomb,
Atomic bombings of Hiroshima,
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हिरोशिमा
Tuesday, November 10, 2009
अमन चैन
आजाद नहीं पर एक मुल्क थे भारत और ए पाकिस्तान
मुक्त धरा बस एक था सपना चाहे हिन्दू या मुसलमान
मिलजुल रहे दोनों समुदाय आजादी थी एक लड़ाई
एकजुट होकर डटे रहे तो स्वतंत्र रास्ट्र की संज्ञा पाई
जाति अलग हो धर्म अलग हो भेष-भूषा रहन-सहन अलग हो
मानव तो मानव ही होता देश अलग हो खान-पान अलग हो
मानव से मानव के विरोध का जन्मजात नही कोई आधार
पर सत्ता के लोभी जन करते मन में खड़ी अंतर की दीवार
ए तेरा वो मेरा का ही जाप हमेसा करते रहते
वैचारिक मतभेदों वाली जीभ ना रुकती कहते कहते
छोटी सी बात सुलझाने वाली बड़ा मुद्दा बन जाती है
बिना वजह और बिना बिचारे नफ़रत घर कर जाती है
सत्ता की रोटी की खातिर मन में आग लगाई जाती है
भले बुरे का भेद मिटाकर सत्ता की भूख मिटाई जाती है
भारत पाक की जेलों में हजारों एक दूसरे के नागरिक
मानवता से परे झेलते मानसिक शारीरिक कष्ट अनैतिक
कूटनीति की चालों पर कुछ जेलों से छोड़े जाते हैं
पर समय के जाते उसी तादात में फिर से पकड़े जाते हैं
सिग्नल पे जब लाल हो बत्ती तो रुकता हर गाड़ी वाला
रंग बिरंगी चिडियों को पकड़े पास में आता पिजड़े वाला
अभी आजाद करुँ मैं इनको बाबू जी दे दो इतने दाम
ए दुआएं देंगे तुमको सुधरेंगे सारे बिगड़े काम
कभी कोई बड़ा दिल वाला बातों में पड़ जाता है
पंछियों को आजाद कराके वो आंगे बढ़ जाता है
चिड़ीपकड़ के अपने शागिर्द फिर से जाल बिछाते हैं
छोड़े गए अधिकतर पंछी फिर से पकड़े जाते हैं
कहे रजनीश हम सब आपसी सदभाव ना भूलें
दिल में प्रेम बड़ा लाजिमी तो शरहद को भूलें
भारत-पाक में फर्क मिटाकर आओ मिलजुल गायें
अमन चैन का बिगुल बजाकर भारत नया बनाएं
"रचयिता - रजनीश शुक्ला, रीवा (म. प्र.)"
मुक्त धरा बस एक था सपना चाहे हिन्दू या मुसलमान
मिलजुल रहे दोनों समुदाय आजादी थी एक लड़ाई
एकजुट होकर डटे रहे तो स्वतंत्र रास्ट्र की संज्ञा पाई
जाति अलग हो धर्म अलग हो भेष-भूषा रहन-सहन अलग हो
मानव तो मानव ही होता देश अलग हो खान-पान अलग हो
मानव से मानव के विरोध का जन्मजात नही कोई आधार
पर सत्ता के लोभी जन करते मन में खड़ी अंतर की दीवार
ए तेरा वो मेरा का ही जाप हमेसा करते रहते
वैचारिक मतभेदों वाली जीभ ना रुकती कहते कहते
छोटी सी बात सुलझाने वाली बड़ा मुद्दा बन जाती है
बिना वजह और बिना बिचारे नफ़रत घर कर जाती है
सत्ता की रोटी की खातिर मन में आग लगाई जाती है
भले बुरे का भेद मिटाकर सत्ता की भूख मिटाई जाती है
भारत पाक की जेलों में हजारों एक दूसरे के नागरिक
मानवता से परे झेलते मानसिक शारीरिक कष्ट अनैतिक
कूटनीति की चालों पर कुछ जेलों से छोड़े जाते हैं
पर समय के जाते उसी तादात में फिर से पकड़े जाते हैं
सिग्नल पे जब लाल हो बत्ती तो रुकता हर गाड़ी वाला
रंग बिरंगी चिडियों को पकड़े पास में आता पिजड़े वाला
अभी आजाद करुँ मैं इनको बाबू जी दे दो इतने दाम
ए दुआएं देंगे तुमको सुधरेंगे सारे बिगड़े काम
कभी कोई बड़ा दिल वाला बातों में पड़ जाता है
पंछियों को आजाद कराके वो आंगे बढ़ जाता है
चिड़ीपकड़ के अपने शागिर्द फिर से जाल बिछाते हैं
छोड़े गए अधिकतर पंछी फिर से पकड़े जाते हैं
कहे रजनीश हम सब आपसी सदभाव ना भूलें
दिल में प्रेम बड़ा लाजिमी तो शरहद को भूलें
भारत-पाक में फर्क मिटाकर आओ मिलजुल गायें
अमन चैन का बिगुल बजाकर भारत नया बनाएं
"रचयिता - रजनीश शुक्ला, रीवा (म. प्र.)"
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