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Saturday, May 14, 2011
Sunday, August 23, 2009
अतीत
मैं अकिंचन करुँ निवेदन माँ शारदे आओ चिंतन में
भारतीय संस्कृति प्राचीनतम सबसे प्राचीन है भाषा संस्कृत
मिश्र रोमा यूनान का पतन पर हिंद संस्कृति अभी भी जीवित
वेदों में सब ज्ञान की बातें अपने वेदों पर हमको है मान
चीन को किसने सभ्य बनाया देकर उनको कपडो का ज्ञान
आर्यभट ने पहले सिखलाया गणित में शून्य बड़ा अनमोल
वराहमिहिर ने पहले बतलाया देखो यह पृथ्वी है गोल
आदिकाल से करते आये नौ ग्रहों की पूजा हम रोज
बाकी दुनिया वालो सुन लो बाद में की तुमने यह खोज
दुनिया में आयुर्वेद जो लाये वो थे अपने चरक महान
द्रुत करती सारी गणनाएं वैदिक गणित बड़ी आसान
अमृतसर में सोने का मंदिर सकल विश्व में भारत की शान
कोहिनूर नहीं साधारण हीरा अपितु जगत में भारत की आन
नालंदा और तक्षशिला पूरी दुनिया में थे जाने जाते
संपूर्ण विश्व से विद्यार्थी भारत में थे पढने आते
फाह्यान चीनी विद्यार्थी लिखे अद्वितीय भारत का वैभव
दुनिया तो दुनिया जैसी पर भारत एक अनोखा अनुभव
भारत एक सोने की चिडिया चन्द्रगुप्त का था जब शाशन
घरों में न तालों का प्रचलन देश में था इतना अनुशाशन
अतीत हमारा गौरव शाली जरूरी इसकी गरिमा का ज्ञान
कला और संस्कृति के दम से ही विश्व में है होती पहचान
कहे रजनीश अभी समय है हम अपना अस्तित्व न भूलें
अतीत हमारा गौरव शाली सब जन मिलकर बोलें
आज और कल का भेद भुलाकर आओ मिल जुल गायें
अतीत के गौरव को दुहराकर भारत नया बनायें
रचयिता:"रजनीश शुक्ला, रीवा(म. प्र।)"
*Photo by Dinesh Chandra Varshney for Bharat Nav Nirman Only
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