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Monday, August 17, 2009

ग्रामोदय


कश्मीर से रामेश्वर तक फैला भारत मेरा पावन देश
भेष-भूसा रहन- सहन खान-पान विविधता विशेष
कलकल करती नटखट नदियाँ विस्तृत समतल धरा अपार
कश्मीर में है केशर की खेती तो बस्तर में वन का विस्तार
आर्यवर्त गावों का देश मिल जुल कर रहे सकल समुदाय
मेहनत से उगता है मोती खेती इसका मुख्य व्यवसाय
गाँव हमारे विश्व मंच पर कृषि प्रधान होने का कारण
यदि गाँव होते कृषक होते होता जनता का पोषण
यदि गाँव में मिलती बिजली पानी और जीविका का साधन
पक्की होती कच्ची सड़कें तो निर्धन जन क्यूँ करें पलायन
कितने ही वादे किये गए नदी पे पुल पर बने नहीं
गिन चुनकर रिश्वत लेकर बने तो फिर वो टिके नहीं
वर्षो बीते शोषण में जीते तब आया पंचायती राज
अवसर धन की कर पहचान ग्रामजन करें स्वयं ही राज
अनपढ़ अनगढ़ बुझी बुझी सी है यह जनता लाचार
प्रबुद्ध प्रखर बन कैसे समझापाती अपने अधिकार
आन पड़ी विपदा बड़ी पर चिकित्सालय तो दूरी है
कैसे करें धन का उपाय तो वाहन भी मजबूरी है
गाँव के नन्हे मुन्हे बच्चे जब मीलों पैदल चलते हैं
तब जाकर शिक्षा के अक्षर उनके दामन पड़ते हैं
कहे रजनीश अभी वक़्त है हम अपना कर्त्तव्य भूलें
जब जड़े हमारी गाँवो में तो थोडा समय निकालें
गाँव शहर का भेद मिटाकर आओ मिल जुल गायें
ग्रामोदय का बिगुल बजाकर भारत नया बनायें

रचयिता:"रजनीश शुक्ला, रीवा (म. प्र.)"

4 comments:

RUPAK_REWA said...

Kaun kare Udhaar ,
yadi hum swayam Palayit baithe hain,
Nirbal aur lachaar,
Nayi Drishti ko lalaayit baithe hain.

Anonymous said...

Date 6/12/2009,
Chandra Prakash Tiwari,
Indian Air Force,
Yalanka, Bangalore :

भारत माता की जय !!!!!!
भारत वर्ष गांवों का देश है | हमारे रास्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की कल्पना थी की स्वतंत्रता के बाद गांवों का बहुत तेजी से विकाश होगा | ग्राम स्वराज की स्थापना होगी | सभी ग्रामवासी भाईचारे तथा सदभावना के साथ ग्राम विकाश में अग्रसर होंगे | लेकिन बापू जी की यह कल्पना एक दुहस्वप्न बन कर रह गयी है | हमारे देश की सरकार ने पंचायती राज्य व्यवस्था कायम करके सत्ता का विकेंद्रीकरण करने की कोशिस की है | यह गांवों के विकाश के लिए सरकार द्वारा उठाया गया एक अच्छा कदम है | मै इस कदम की सराहना करता हूँ | हमारी सरकार पंचायती राज्य व्यवस्था कायम करके बापू जी की कल्पना को साकार मूर्ती देने का काम तो कर रही है लेकिन गांवों में रहने वाले लोग या कहा जाये की गांवों में छोटे छोटे समाजों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग समाज का जाति वर्ग में बटवारा अपने तरीके से करके अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए हैं | उनको इस बात का फर्क नहीं पड़ता की समाज में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा | गाँव का इसमें विकाश होगा की नहीं | बस अपने आप को प्रभावी बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं | मैं गाँव और शहर के नवयुवकों से यह अपील करता हूँ की आप अपने गाँव के विकाश की धारा में तेजी लायें | समाज के ठेकेदार जो गाँव को विभिन्न जाति वर्ग में बाटकर अपना उल्लू सीधा करते हैं, ऐसे ठेकेदारों के बारे में ग्राम तथा समाज को अवगत कराएँ | हमारे देश का विकाश आप सभी की स्वस्थ विचारों पर निहित है | इन विचारों के क्रियान्वयन पर निहित है | आप सब अपनी युवा सोच के साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों तथा जातियों को एक सूत्र में पिरोकर विकाश में अपनी अग्रणी भूमिका निभाएं |Continued...

Anonymous said...

......(Continuation Of Previous Comment)भाईचारे तथा सदभावना का वातावरण बनाते हुए भ्रस्टाचार व अन्य कुरीतियों को दूर करने का प्रयाश करें | हमारे रास्ट्रपिता की कल्पना को साकार करने हेतु एक नया आयाम दें |Good work by Bharat Nav Nirman. जय हिंद ! जय भारतवर्ष !

अनुनाद सिंह said...

आपका यह प्रयोग सफल हो, यही शुभकामना है। लिखते रहिये।

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