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Thursday, June 17, 2010

जल संकट



जल संकट गहराया भाई भई समस्या बड़ी कठिन
भूमिगत जल का स्तर गिरता जाता दिन प्रतिदिन

रस्सी लाना पानी भरना गाँवों में घर घर का प्रचलन
चार महीने सूखे फिर रहना बूँद बूँद का बड़ा जतन

जिन नदियों में कभी न टूटी पानी वाली धारा
छोटे छोटे कुंड में बिखरा गर्मी में जल सारा

कर्ज से कर्ज का सूद चुकाकर नलकूप कराती जनता
मीठा जल पर बिन पैंसों के बिन बरसात न बनता

अटके प्राण असाढ़ गले में घंटों पीटे पम्पा
मानसून दस्तक दे जाए तो भगवन अनुकम्पा

बर्षा में जल का संचय चीख चीख धरती करे पुकार
वृक्षारोपण से न होगा जल बिन कल मानव लाचार

कहे रजनीश मिल जुल हम सब करें जतन
जब जल न होगा न होगा कल धरा पे जीवन

रचयिता
- रजनीश शुक्ला (रीवा, म. प्र।)
*Photo from http://photos.merinews.com/newPhotoLanding.jsp?imageID=11484

2 comments:

Anonymous said...

Deepak Vishwakarma:
(Scientist DRDO)

Nice one rajneesh...you always impress...Keep it up...

RUPAK_REWA said...

Bahut badhiya rachna!
Vriksharopan ke saath saath water harvesting ka gyaan bhi logo me failana zaroori hai, shehron me kitna jal aise hi waste ho jata hai...agle post me water harvesting ke kuch tips ki apeksha hai!

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